मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जहां 250 से अधिक गरीब परिवारों को मिलने वाले खाद्यान्न वितरण में करीब 1 करोड़ रुपए से अधिक की हेराफेरी पकड़ी गई है। साल 2025 से ‘शिक्षित बेरोजगार सहकारी शाख समिति मर्यादित’ द्वारा संचालित उचित मूल्य की दुकानों से गरीबों को राशन नहीं बांटा जा रहा था। फूड इंस्पेक्टर की गहन जांच के बाद इस पूरे फर्जीड़े का खुलासा हुआ है और कलेक्टर के निर्देश पर कोतवाली थाने में एफआईआर की कार्रवाई की गई है।
📦 जून से अगस्त 2025 का नहीं हुआ था अनाज का वितरण: भौतिक सत्यापन में खुली पोल, स्टॉक में मिला भारी अंतर
खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार, बेरोजगार सहकारी शाख समिति द्वारा संचालित दो उचित मूल्य की दुकानों के प्रबंधक हर्ष तिवारी ने अगस्त 2025 में अतिरिक्त आवंटन की मांग की थी। दुकान के विक्रेता हर्ष तिवारी और उनके पिता प्रकाश तिवारी ने दावा किया था कि जून, जुलाई और अगस्त का अनाज मई 2025 में ही बांटा जाना था, लेकिन करीब 250 से 300 परिवारों को कोई खाद्यान्न नहीं मिला। जब प्रशासन ने दुकानों पर उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया, तो रिकॉर्ड और स्टॉक में भारी अंतर पाया गया।
⚖️️ कलेक्टर के निर्देश पर एफआईआर और दुकानों को अन्यत्र संलग्न करने के आदेश: डिप्टी कलेक्टर ने दी पूरी जानकारी
डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी सरोज परिहार ने बताया कि जांच रिपोर्ट में 1 करोड़ रुपए के घोटाले की पुष्टि हुई है, जो वसूली योग्य है। इस मामले में सेल्समैन हर्ष तिवारी और प्रकाश तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही प्रभावित दोनों दुकानों को दूसरी उचित मूल्य दुकानों के साथ संलग्न (अटैच) करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं ताकि उपभोक्ताओं को समय पर राशन मिल सके।

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