सनातन परंपरा में रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यदेव को जीवन, ऊर्जा, प्रकाश और आत्मविश्वास का मुख्य कारक माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा और उन्हें जल अर्पित करने की प्राचीन परंपरा है। नियमित रूप से सूर्यदेव की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं और सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से जल अर्पित कर यश व सम्मान की कामना करते हैं।
🧭 पूजा के दौरान किस दिशा में होना चाहिए मुख? जानिए सूर्यदेव को अर्घ्य देने का सबसे सही और पारंपरिक तरीका
वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यदेव की पूजा करते समय हमेशा पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठना या खड़े होना शुभ माना जाता है, क्योंकि इसी दिशा से सूर्य का उदय होता है। सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनकर तांबे के पात्र में साफ जल लेकर धीरे-धीरे सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है। कुछ लोग जल में लाल फूल, रोली या अक्षत भी मिलाते हैं। अर्घ्य देते समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
✨ सूर्य पूजा से जुड़े जरूरी नियम और इसके धार्मिक लाभ: कुंडली में मजबूत होता है आत्मबल और नेतृत्व क्षमता
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मबल, पिता, मान-सम्मान और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उन्हें नियमित रूप से सूर्य को जल देने की सलाह दी जाती है। सुबह के समय की गई सूर्य उपासना से न केवल शारीरिक ऊर्जा मिलती है, बल्कि समाज में यश और प्रतिष्ठा की भी प्राप्ति होती है। पूजा के दौरान साफ-सफाई और अपनी श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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