देश भर के शैक्षणिक संस्थानों और हॉस्टलों में छात्र-छात्राओं द्वारा उठाए जा रहे आत्मघाती कदमों को रोकने के लिए भारत सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण ‘स्पंदन योजना’ लागू की है। इस योजना के तहत अब युवाओं को मानसिक तनाव से उबारने के लिए नियमित काउंसलिंग की जाएगी और हॉस्टल के कमरों से लेकर परिसरों में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक हब इंदौर और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) जैसे संस्थानों में भी इस नीति के तहत कड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
📊 NCRB के आंकड़े और तनाव की वजह: 18 से 30 वर्ष के युवा बन रहे हैं सबसे ज्यादा शिकार
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में सामने आने वाले कुल आत्महत्या के मामलों में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी 18 से 30 वर्ष के युवाओं की है। परीक्षाओं में असफलता, करियर की चिंता, बेरोजगारी और प्रेम प्रसंग जैसी वजहों से अधिकांश युवा मानसिक तनाव का शिकार होकर यह खौफनाक कदम उठा रहे हैं। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और कोचिंग संस्थानों के लिए नई मेंटल हेल्थ पॉलिसी तैयार की है, जिसके तहत बुनियादी ढांचे में बदलाव के निर्देश दिए गए हैं।
🛡️ हॉस्टल कमरों में लगेंगे विशेष स्प्रिंग वाले पंखे और नियुक्त होंगे मनोवैज्ञानिक काउंसलर
स्पंदन योजना के तहत हॉस्टलों के कमरों में अब ‘टैंपर प्रूफ सीलिंग फैन’ लगाए जाएंगे, जो अधिक वजन पड़ते ही स्प्रिंग तकनीक के जरिए नीचे आ जाते हैं। इसके साथ ही खिड़कियों पर मजबूत ग्रिल और बड़े पैमाने पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष प्रोफेसर लक्ष्मीकांत त्रिपाठी ने बताया कि जिन संस्थानों में 100 से अधिक छात्र-छात्राएं हैं, वहां प्रोफेशनल काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य की गई है, ताकि समय रहते तनावग्रस्त युवाओं की पहचान कर उनकी जान बचाई जा सके।

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