“महिलाएं शाम को घर से बाहर न निकलें, सुनसान रास्तों से बचें या कपड़ों को लेकर सतर्क रहें…” सुरक्षा के नाम पर महिलाओं पर थोपी जाने वाली इन तमाम बंदिशों के खिलाफ शुक्रवार शाम राजधानी भोपाल में जोरदार आक्रोश देखने को मिला। करीब 300 से ज्यादा महिलाएं और युवतियां हाथों में तख्तियां लेकर सड़क पर उतरीं और कमला पार्क से गैमन मॉल तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला। इस मार्च में बेटियों के साथ उनकी माताएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं, जिन्होंने एक स्वर में स्पष्ट किया कि अब वे डर के साये में नहीं जिएंगी।
🎯 संयोजक विदुषी बोलीं—बेटियों पर पाबंदी लगाने के बजाय बेटों की सोच सुधारने की है सख्त जरूरत
प्रदर्शन की संयोजक विदुषी ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि हमेशा लड़कियों को ही शाम के वक्त घर से बाहर न निकलने की हिदायत क्यों दी जाती है? उन्होंने कहा कि पाबंदियां लड़कियों पर लगाने के बजाय राह चलते भद्दे कमेंट करने वाले पुरुषों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। मार्च के दौरान महिलाओं ने “हमें डर में जीना नहीं, अपने हक से झुकना नहीं” जैसे बुलंद नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि गलत हरकतें करने वालों को अब कड़ा जवाब दिया जाएगा।
⚖️ “जब तक समाज में सुधार नहीं आता, तब तक जारी रहेंगे प्रदर्शन”: दिल्ली के आंदोलन की गूंज भोपाल तक पहुंची
एक अन्य प्रदर्शनकारी महिला ने मीडिया से चर्चा में कहा कि देश के अन्य हिस्सों की तरह अब भोपाल और प्रदेश के दूसरे जिलों में भी महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों और महिलाओं पर फब्तियां कसने की घटनाओं के बावजूद समाज का रुख हमेशा युवतियों पर ही पाबंदी लगाने का रहता है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि पुरुषवादी सोच और समाज में सुधार नहीं आया, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और अधिक उग्र रूप लेगा।

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