September 4, 2026

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Shri Krishna Janmashtami 2026 Shubh Muhurat: मध्य प्रदेश में धूमधाम से मनाई जा रही जन्माष्टमी, जानिए रात्रि 12 बजे पूजा का सही समय और विधि

मध्य प्रदेश समेत पूरे देश-दुनिया में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी के इस खास मौके पर भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने और उनकी असीम कृपा पाने के लिए श्रद्धालु उपवास रखते हैं, विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और विभिन्न अनुष्ठान करते हैं। इस विशेष लेख में जानिए कि आप किस प्रकार जन्माष्टमी की पूजा संपन्न कर सकते हैं और एक खास फूल व माला के जरिए लड्डू-गोपाल को कैसे प्रसन्न कर सकते हैं।

⏰ ऐसे करें जन्माष्टमी पूजन की शुरुआत और आधी रात 12 बजे भगवान का अभिषेक

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रातःकाल उठकर विधि-विधान से व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा की शुरुआत करते हुए सबसे पहले स्नान करें और पूरे घर का गंगाजल से छिड़काव कर शुद्धिकरण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान की एक सुंदर और दिव्य झांकी सजाएं। लड्डू-गोपाल की नई प्रतिमा या फिर घर में पहले से पूजी जा रही मूर्ति को पूजा स्थल पर दूध में रखें। दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को नियमित पूजन करें और ठीक मध्यरात्रि 12:00 बजे दूध में रखी मूर्ति को बाहर निकालकर शुद्ध जल व पंचामृत से उनका महास्नान कराएं। इसके बाद भगवान कृष्ण को झांकी में रखे झूले पर विराजमान करें और उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाकर उनका भव्य श्रृंगार करें।

🌸 वैजंती के फूलों और माला से भगवान को करें प्रसन्न, बन रहे हैं कई दुर्लभ शुभ योग

ज्योतिषाचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री बताते हैं कि शास्त्रों में वैजंती के फूल और माला का विशेष महत्व बताया गया है। यदि यह फूल मिल जाए, तो इसे भगवान के चारों तरफ रख दें। इसके अलावा, इस फूल के अंदर से निकलने वाले 108 दानों को पिरोकर वैजंती माला तैयार करें और भगवान को अर्पित करें। ऐसा करने से भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न होते हैं, उनकी विशेष कृपा बरसती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस बार जन्माष्टमी पर कई दुर्लभ योग भी बन रहे हैं; आज रोहिणी नक्षत्र (जिसमें भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था) के साथ-साथ हर्षल योग और मित्र योग का संयोग भी है। मान्यता है कि मित्र योग में पूजा करने से आपसी मतभेद दूर होते हैं और रिश्तों में प्रगाढ़ता आती है। इस वर्ष जन्माष्टमी पूजन का मुख्य मुहूर्त रात्रि 11:57 बजे से लेकर 12:42 बजे तक रहेगा।

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