मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और संजय गांधी टाइगर रिजर्व में हाथियों की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए अब उन पर व्यापक वैज्ञानिक शोध और अनुसंधान का कार्य शुरू कर दिया गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) देहरादून के विशेषज्ञ रिसर्चर इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। लगभग 3 वर्षों (2026-28) तक चलने वाले इस वैज्ञानिक अध्ययन के जरिए हाथियों के प्राकृतिक आवास, रहन-सहन, व्यवहार और उनके विचरण (मूवमेंट) का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा, जिससे एशियाई हाथियों की ईकोलॉजी को और बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। हाल ही में बांधवगढ़ के ताला ईको सेंटर में देश के दिग्गज रिसर्चर्स के बीच इस रिसर्च को लेकर एक विस्तृत मंथन भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रोजेक्ट से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेष प्रस्तुतियां दी गईं।
📡 6 हाथियों को पहनाए जाएंगे रेडियो कॉलर, जीपीएस टेलीमेट्री से होगी हर गतिविधि की निगरानी
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने जानकारी देते हुए बताया कि सेंट्रल इंडिया के इस एंट्री रीजन में पहले हाथी नहीं हुआ करते थे, लेकिन अब यहाँ हाथियों के लगातार आने से इस क्षेत्र में कई तरह की नई रिसर्च की संभावनाएं बन गई हैं। इस विशेष शोध के तहत कुल 6 हाथियों (चार बांधवगढ़ और दो संजय गांधी टाइगर रिजर्व के) को रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा। आमतौर पर झुंड की अगुवाई करने वाली फीमेल लीडर हथिनी को यह कॉलर लगाया जाएगा, जिससे उनकी हर एक गतिविधि, उनके सफर, विश्राम स्थलों और दोनों रिजर्व के बीच आने-जाने के रास्तों (कॉरिडोर) की सटीक जानकारी मिल सकेगी। इस तकनीक और जीपीएस टेलीमेट्री, रिमोट सेंसिंग व जीआईएस आधारित स्थानिक विश्लेषण के माध्यम से वैज्ञानिकों को हाथियों के होम-रेंज डायनामिक्स को समझने में आसानी होगी।
⚠️ मानव-हाथी संघर्ष के हॉटस्पॉट और कारणों की होगी पहचान, सह-अस्तित्व को मिलेगा बढ़ावा
WII देहरादून के प्रोजेक्ट एसोसिएट और रिसर्चर शिवम शर्मा ने बताया कि यह शोध परियोजना मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के परिदृश्य में एशियाई हाथियों की पारिस्थितिकी और उनके विचरण व्यवहार को समझने पर केंद्रित है। इस रिसर्च के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि हाथियों को यहाँ का कौन सा आवास पसंद आ रहा है, वे क्या खाते हैं और मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) के पीछे की असली वजहें क्या हैं। यह अध्ययन यह भी परखेगा कि संघर्ष के मामले गांवों में क्यों बढ़ रहे हैं और इसके पीछे स्थानीय फसलों या जंगलों की क्या भूमिका है। इस 3 साल लंबे अध्ययन के निष्कर्षों से प्रशासन को प्रभावी प्रबंधन रणनीति बनाने, महत्वपूर्ण कॉरिडोर की रक्षा करने और हाथियों एवं स्थानीय समुदायों के बीच एक स्थायी सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

More Stories
Shri Krishna Janmashtami 2026 Shubh Muhurat: मध्य प्रदेश में धूमधाम से मनाई जा रही जन्माष्टमी, जानिए रात्रि 12 बजे पूजा का सही समय और विधि
Khandwa Police and Forest Department Investigation: कोतवाली पुलिस और वन विभाग ने किया कब्रिस्तान का निरीक्षण, लकड़ी बेचने और अनुमति पर उठे सवाल
Bandhol Thana Seoni Robbery Case: एसपी कृष्ण लालचंदानी ने किया घटनास्थल का निरीक्षण, हाईवे के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस