September 4, 2026

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Bageshwar Dham Jan Seva Samiti Kathmandu: नेपाल के गृह मंत्रालय को सौंपी गई राहत सामग्री, धीरेंद्र शास्त्री के शिष्यों ने की मदद

पड़ोसी देश नेपाल में आई भयानक प्राकृतिक त्रासदी के कारण हजारों परिवार पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। संकट की इस विकट घड़ी में भारत सरकार के साथ-साथ कई प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक संगठन भी नेपाल के राहत कार्यों में लगातार मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इसी मानवीय पहल के तहत मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम से नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजी गई है। बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के विशेष सहयोग से राहत सामग्री से भरे कुल 4 बड़े ट्रक सीधे काठमांडू पहुँचे, जहाँ सेवादारों ने पूरी सामग्री आधिकारिक रूप से नेपाल सरकार को सौंप दी है।

📦 चावल, दाल, तिरपाल और बर्तन समेत दैनिक उपयोग का सामान पहुँचा, नेपाल गृह मंत्रालय ने जताया आभार

बागेश्वर धाम के प्रतिनिधि मनोज त्रिवेदी ने नेपाल पहुँचकर वहाँ के स्थानीय शिष्यमंडल के साथ मिलकर राहत सामग्री नेपाल सरकार के गृह मंत्रालय के सुपुर्द की। इस राहत सामग्री में आपदा पीड़ितों के लिए चावल, दाल, मसाले, नमक, पीने का पानी, सोयाबीन तेल, बिस्कुट, नमकीन के साथ-साथ खाना खाने और बनाने के लिए थाली, गिलास व कटोरी जैसी अति-आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। इस पूरी सहायता का उद्देश्य केवल राशन पहुँचाना नहीं, बल्कि उस आपदा में अपना सब कुछ गँवा चुके परिवारों को उनके जीवन की बुनियादी और तत्काल जरूरतों का संबल प्रदान करना है। राहत सामग्री मिलने पर नेपाल सरकार ने भी बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है।

🌏 जापान दौरे पर थे बाबा बागेश्वर, सूचना मिलते ही शिष्यों को दिए थे मदद के निर्देश

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब नेपाल में यह बड़ी त्रासदी आई, उस समय बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जापान के दौरे पर थे। जैसे ही उन्हें इस भीषण आपदा की खबर मिली, उन्होंने तुरंत नेपाली नागरिकों और अपने स्थानीय शिष्य मंडल से संपर्क साधा। महाराज श्री के कड़े आदेश मिलते ही काठमांडू में सक्रिय बागेश्वर धाम शिष्य मंडल और जन सेवा समिति युद्ध स्तर पर जुट गई। पंडित धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि भारत और नेपाल के संबंध केवल सरहदों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह ‘रोटी-बेटी’ और गहरी भावनाओं का पवित्र रिश्ता है, और ऐसे संकट काल में पड़ोसी देश के साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ी मानवता है।

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