August 31, 2026

News Prawah

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Ujjain Chakratirtha Crematorium Video: उज्जैन के श्मशान में तलवार लेकर तांत्रिक क्रिया और मांस खाने का वीडियो वायरल, संत समाज ने जताई कड़ी आपत्ति

मध्य प्रदेश के धार्मिक नगर उज्जैन के प्रसिद्ध चक्रतीर्थ श्मशान से जुड़ा एक सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो किन्नर अखाड़े से जुड़ी काली उर्फ नंद गिरी के इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया गया बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में तांत्रिक वेशभूषा में नजर आ रही महिला हाथ में तलवार लेकर तांत्रिक क्रिया करती और जलती चिता के पास जाकर कथित तौर पर मानव अवशेष निकालकर खाने का दावा करती हुई दिखाई दे रही है। इस अमानवीय और चौंकाने वाले वीडियो के सामने आने के बाद आम जनता और संत समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है, तथा सोशल मीडिया पर इस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

⚠️ महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा—गोपनीय अघोर साधनाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन है वैदिक परंपराओं का अपमान

इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी ने तीखी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अघोर साधनाओं की अपनी एक निश्चित मर्यादा और नियम होते हैं, और इस तरह की तांत्रिक क्रियाओं का सोशल मीडिया पर सार्वजनिक प्रदर्शन करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी प्रसिद्धि, व्यापारिक लाभ या प्रचार के लिए ऐसी गतिविधियों का प्रसारण करना सनातन वैदिक परंपराओं का अपमान है। इस तरह का कृत्य करने वाले को आज का आधुनिक समाज मानवीय नहीं बल्कि नर पिशाच जैसा मानता है, इसलिए प्रशासन को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

📜 डिस्कवरी चैनल के विवाद का दिया हवाला, कहा—गोपनीय साधनाओं को सार्वजनिक करने वाले ‘कालनेमी साधक’ होते हैं

महामंडलेश्वर ने आगे बताया कि कुछ वर्ष पूर्व डिस्कवरी चैनल और अन्य खोजी चैनलों ने भी भारतीय वैदिक तंत्रात्मक पद्धति पर रिकॉर्डिंग की थी, लेकिन हिंदू संतों के विरोध के बाद उन दृश्यों को ब्लर कर दिया गया था क्योंकि ये बेहद गोपनीय साधनाएं होती हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जो भी साधक ऐसी विधाओं को प्रचार के लिए सार्वजनिक करता है, वह साधक न होकर असल में ‘कालनेमी’ या पदभ्रष्ट हो सकता है। आधुनिक भारत में भय, घृणा या इस तरह के भ्रामक और अमानवीय कृत्यों का प्रसार करने वाली चेष्टाओं के लिए कोई जगह नहीं है, और शासन-प्रशासन को ऐसे तत्वों पर लगाम कसनी ही होगी।

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