August 24, 2026

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Bhojpali Baba Narmada Parikrama: डबल एमए और वकालत छोड़ संत बने रविंद्र गुप्ता, अब कर रहे हैं 8वीं नर्मदा परिक्रमा

अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर आंदोलन से गहराई से जुड़े रहे ‘भोजपाली बाबा’ ने एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू कर दी है। वे अब तक कुल 7 बार नर्मदा परिक्रमा पूरी कर चुके हैं और वर्तमान में अपनी 8वीं नर्मदा परिक्रमा पर निकल पड़े हैं। मूल रूप से भोपाल के रहने वाले भोजपाली बाबा का वास्तविक नाम रविंद्र गुप्ता है। वे काफी उच्च शिक्षित हैं और उन्होंने दर्शनशास्त्र व मनोविज्ञान में डबल एमए करने के बाद एलएलबी की डिग्री हासिल की थी, जिसके बाद उन्होंने करीब 5 साल तक वकालत भी की। अविवाहित रहकर समाज और राष्ट्र सेवा में समर्पित रहने वाले रविंद्र गुप्ता के एक आम युवक से ‘भोजपाली बाबा’ बनने तक का यह सफर बेहद प्रेरणादायक और रोचक रहा है।

🏛️ राम मंदिर आंदोलन से रहा है गहरा नाता, पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते बाद में लिया वैराग्य

अपने जीवन के सफर के बारे में बताते हुए भोजपाली बाबा साझा करते हैं कि वे दिसंबर 1992 से ही अयोध्या राम मंदिर आंदोलन और संगठन से जुड़ गए थे। उस समय वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में भोपाल के संयोजक के रूप में सक्रिय थे। उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर नहीं बन जाता, वे विवाह नहीं करेंगे। उन्हें लगा था कि मंदिर 4-5 साल में बन जाएगा, लेकिन लंबा इंतजार करना पड़ा। इस बीच भोपाल गैस त्रासदी के दौरान उनके पिता को दमा की गंभीर बीमारी हो गई, जिसके कारण वे परिवार की जिम्मेदारी छोड़कर नहीं जा सके। पिता के निधन के बाद वर्ष 2004 में उन्होंने पूरी तरह परिवार त्याग दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लिए समर्पित होकर काम करने लगे।

🌊 मां नर्मदा की कृपा से मिला वैराग्य, राम मंदिर चंदा चोरी की घटना से दुखी हैं बाबा

90 के दशक में एबीवीपी और बजरंग दल में विभिन्न दायित्व संभालने वाले भोजपाली बाबा खुद इस बात पर अचरज जताते हैं कि वे कब और कैसे संत बन गए। उनकी जीवन की पहली नर्मदा परिक्रमा वर्ष 2012 में हुई थी। इसके बाद मां नर्मदा की ऐसी कृपा हुई कि वे एक के बाद एक परिक्रमा करते गए और अब वे अपनी आठवीं परिक्रमा पर हैं। वर्ष 2024 में जब उन्हें राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिला, तो वे हैरान रह गए क्योंकि वे 2017 में ही संगठन के सभी औपचारिक दायित्व छोड़ चुके थे। दूसरी ओर, राम मंदिर में चंदा चोरी की घटनाओं और मौजूदा दौर के ‘जेन-जी’ आंदोलनों पर अपनी बेबाक राय रखते हुए बाबा ने दुख जताया कि मंदिर ट्रस्ट में ऐसे लोगों को जगह दी गई जो भावनात्मक रूप से इस लंबे आंदोलन से कभी जुड़े ही नहीं थे।

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