मध्य प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसी बीच भिंड जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। वायरल वीडियो में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर टायर-ट्यूब के सहारे उफनती नदी पार करते हुए स्कूल जाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद जहाँ कुछ लोग इसे ई-अटेंडेंस के दबाव से जोड़ रहे हैं, वहीं कुछ इसे अपनी नौकरी और सैलरी बचाने की मजबूरी बता रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है इस सनसनीखेज मामले की पूरी सच्चाई।
🏫 चारों तरफ से नदी से घिरा स्कूल, टायर-ट्यूब ही आवागमन का एकमात्र सहारा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला भिंड विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बबेड़ी का है। यहाँ के मजरा गाँव ‘नदरौली’ में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के लिए स्कूल पहुँचना किसी बड़ी जंग जीतने से कम नहीं है। नदरौली गाँव चारों तरफ से वैसली नदी से घिरा हुआ है, और गाँव तक पहुँचने के लिए न तो कोई पक्की सड़क है और न ही कोई पुल। बरसात के दिनों में यह नदी पूरी तरह उफान पर रहती है। प्राइमरी स्कूल नदी के उस पार बना हुआ है, जिसके चलते स्कूल के प्रभारी शिक्षक राजेश भारती और अन्य स्टाफ सदस्यों को हर दिन नदी किनारे पहुंचकर कपड़े बैग में रखने पड़ते हैं और ग्रामीणों की मदद से टायर-ट्यूब पर बैठकर तैरते हुए उफनती नदी पार करनी पड़ती है।
⚠️ ई-अटेंडेंस की सख्ती और वेतन कटने का डर, प्रशासन ने दिया आश्वासन
शिक्षकों का कहना है कि वे यह खतरनाक जोखिम अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि शासन की सख्त नीतियों के कारण उठाने को मजबूर हैं। सरकार के नए नियमों के तहत स्कूलों में ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है, और यदि कोई शिक्षक अपनी तय लोकेशन पर समय पर उपस्थित नहीं होता है, तो उसकी अटेंडेंस नहीं लगती और सीधे तौर पर वेतन कटने का खतरा बन जाता है। प्राथमिक विद्यालय नदरौली में पदस्थ शिक्षक राजेश भारती, देवेंद्र कुशवाह, महेंद्र भदौरिया और शम्भू कुशवाह को हर दिन इसी तरह संघर्ष करना पड़ता है।
इस गंभीर मामले पर जब भिंड के जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु द्विवेदी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर इस समस्या की जानकारी ले ली गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी विषम और खतरनाक परिस्थितियों में शिक्षकों की अटेंडेंस को लेकर उनका वेतन नहीं काटा जाएगा, साथ ही आसपास के बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक शिक्षा के निर्देश भी दिए गए हैं। बहरहाल, जब तक क्षेत्र में कोई पक्का पुल या सुरक्षित रास्ता नहीं बनता, तब तक इन शिक्षकों और नौनिहालों की जान पर मंडराता खतरा यूं ही बना रहेगा।

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