August 22, 2026

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A2 Milk Benefits and Research: महाकौशल गाय का A2 दूध और घी है बेहद गुणकारी, नानाजी देशमुख विवि की रिसर्च में खुलासा

मध्य प्रदेश के महाकौशल अंचल की प्रसिद्ध गाय अब देश की गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी प्रमुख और प्रतिष्ठित देसी नस्लों की श्रेणी में शामिल हो गई है। हरियाणा के करनाल स्थित ‘नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज’ (ICAR-NBAGR) ने देसी ‘महाकौशल गाय’ (महाकौशली गोवंश) को एक स्वतंत्र स्थानीय नस्ल के रूप में आधिकारिक मान्यता प्रदान कर दी है। इसके साथ ही यह भारत की 57वीं रजिस्टर्ड देसी मवेशी नस्ल बन गई है। इस बड़ी उपलब्धि के पीछे जबलपुर स्थित ‘नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय’ के वैज्ञानिकों की लंबी मेहनत और शोध का बड़ा योगदान है, जिन्होंने वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद इस नस्ल के अनूठे आनुवंशिक गुणों को दुनिया के सामने साबित किया है।

🧬 मध्य प्रदेश की 5वीं रजिस्टर्ड देसी गोवंश नस्ल, रिसर्चर डॉ. मोहन सिंह ने बताई विशेषताएं

यह मध्य प्रदेश की पांचवीं रजिस्टर्ड देसी गोवंश नस्ल है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक मान्यता मिली है। इससे पहले राज्य की चार अन्य देसी नस्लें—मालवी (मालवा), निमाड़ी (खंडवा-खरगोन-बड़वानी), केनकथा (बुंदेलखंड) और गाओलाओ (छिंदवाड़ा-पांढुर्ना)—पहले से ही रजिस्टर्ड थीं। इस पूरे शोध को अंजाम देने वाले विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और प्रोफेसर डॉ. मोहन सिंह ने बताया कि यह छोटे कद की बेहद शांत स्वभाव की गाय होती है, जो मुख्य रूप से जबलपुर, मंडला, डिंडोरी से लेकर अमरकंटक तक के भौगोलिक इलाकों में पाई जाती है।

उन्होंने बताया कि लगभग 5 साल (2020-21) पहले उन्होंने इस स्थानीय प्रजाति पर काम शुरू किया था। लगभग 15,000 से अधिक गायों के शारीरिक बनावट, रंग-रूप और उनके ब्लड सैंपल के आनुवंशिक (जेनेटिक) गुणों का अध्ययन करने के बाद यह पाया गया कि महाकौशल क्षेत्र की यह गाय देश की अन्य प्रजातियों से बिल्कुल भिन्न और विशिष्ट है। महाकौशल अंचल के प्राकृतिक और विषम वातावरण में यह गाय आसानी से पल-बढ़ जाती है। हालांकि इसमें दूध उत्पादन की मात्रा अन्य कामर्शियल नस्लों की तुलना में थोड़ी कम होती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों के किसान इसे घरेलू उपयोग के लिए बड़े चाव से पालते हैं और इसके बछड़े खेती-किसानी तथा बैलों के रूप में बहुत उपयोगी साबित होते हैं।

🥛 अमृत समान है महाकौशल गाय का ‘A2 मिल्क’ और औषधीय घी

प्रोफेसर डॉ. मोहन सिंह के अनुसार, इस शोध के दौरान उनकी टीम ने इस गाय के दूध और उससे बनने वाले घी की गुणवत्ता पर भी गहरा अध्ययन किया है। यह जानकर हैरानी होगी कि महाकौशल गाय का दूध शुद्ध ‘A2 मिल्क’ श्रेणी का है और इसकी क्वालिटी बेहद शानदार है।

  • A2 मिल्क की खासियत: A2 दूध वह होता है जिसमें केवल ‘A2 बीटा-केसीन प्रोटीन’ पाया जाता है, जबकि इसमें हानिकारक ‘A1 प्रोटीन’ नहीं होता है।
  • स्वास्थ्य लाभ: सामान्य दूध को पचाने में कई लोगों को पेट में भारीपन, गैस या सूजन (बीसीएम-7 पेप्टाइड के कारण) की शिकायत होती है, लेकिन A2 मिल्क पेट के लिए बेहद हल्का और सुपाच्य होता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को तेजी से बढ़ाता है।
  • औषधीय घी: इस गाय के दूध से बनने वाला घी किसी औषधि से कम नहीं है, जिसकी सोंधी सुगंध और प्राकृतिक स्वाद बाजार में मिलने वाले सामान्य घी की तुलना में कहीं अधिक बेहतर और शुद्ध होता है।
📈 किसानों और पशुपालकों को मिलेगा सीधा लाभ, कुलगुरु ने दी जानकारी

नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. मनदीप शर्मा ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए बताया कि करनाल स्थित संस्थान (ICAR-NBAGR) में उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी आंकड़े और दावे विभिन्न स्तर की वैज्ञानिक जांच में पूरी तरह खरे उतरे, जिसके बाद महाकौशल गाय को देश की 57वीं प्रजाति के रूप में दर्ज किया गया। कुलगुरु ने कहा कि इस ऐतिहासिक पंजीकरण से भविष्य में क्षेत्रीय किसानों को जबरदस्त आर्थिक फायदा मिलेगा। अब इस नस्ल के संरक्षण, इसके वर्गीकरण और बेहतर नस्ल सुधार (ब्रीडिंग मैनेजमेंट) पर बड़े पैमाने पर काम शुरू किया जाएगा, जिससे पशुपालकों को उनके दूध के उचित और बेहतर दाम मिल सकेंगे। विश्वविद्यालय अब मध्य प्रदेश की अन्य छिपी हुई देसी प्रजातियों को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

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