नईदिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) ने आज अपने सबसे भारी रॉकेट LVM3 के जरिए एक बड़ा सैटेलाइट लॉन्च किया। पहले इस रॉकेट को सुबह 8 बजकर 54 मिनट पर उड़ान भरनी थी, लेकिन बाद में इसका समय बदलकर 8 बजकर 55 मिनट 30 सेकंड कर दिया गया।
इसरो ने यह 90 सेकंड की देरी इसलिए की है ताकि अंतरिक्ष में तैर रहे मलबे (कचरे) या पहले से मौजूद अन्य सैटेलाइट्स से रॉकेट की टक्कर न हो जाए।
इसरो ने बताया कि रॉकेट जिस रास्ते से ऊपर जाने वाला था, वहां कचरा या दूसरे सैटेलाइट्स आ सकते थे। आजकल अंतरिक्ष में बहुत ज्यादा भीड़ हो गई है, इसलिए ऐसे हादसों से बचने के लिए समय में थोड़ा बदलाव करना एक सामान्य और समझदारी भरा कदम है। वैज्ञानिकों की भाषा में इसे ‘कंजंक्शन’ (दो चीजों का करीब आना) कहते हैं।
इस मिशन के जरिए अमेरिका का ‘ब्लूवर्ड ब्लॉक-2’ (BlueBird Block-2) सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा गया। यह अपनी तरह का सबसे बड़ा कमर्शियल सैटेलाइट है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह सीधे आपके स्मार्टफोन पर हाई-स्पीड इंटरनेट (ब्रॉडबैंड) पहुंचाएगा। यानी बिना किसी टावर या केबल के, सीधे अंतरिक्ष से मोबाइल पर इंटरनेट चलेगा।
जिस रॉकेट (LVM3) से यह लॉन्चिंग हो रही है, उसे इसकी ताकत की वजह से ‘बाहुबली’ कहा जाता है।
यह वही रॉकेट है जिसने चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा था।
इसने पिछले महीने भी एक बड़ा मिशन (M5-CMS-03) पूरा किया था।
यह तीन चरणों वाला रॉकेट है जो भारी से भारी वजन को अंतरिक्ष में ले जाने की क्षमता रखता है।
यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) (आईएसआरओ की वाणिज्यिक शाखा) और अमेरिका स्थित एएसटी स्पेसमोबाइल (एएसटी एंड साइंस, एलएलसी) के बीच एक वाणिज्यिक समझौते के तहत संचालित किया जा रहा है।
इस उपग्रह को विश्वभर में स्मार्टफोन को सीधे हाई-स्पीड सेलुलर ब्रॉडबैंड प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे यह मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए वैश्विक एलईओ तारामंडल का हिस्सा बन जाता है।
एएसटी स्पेसमोबाइल अंतरिक्ष आधारित पहला सेलुलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क विकसित कर रहा है, जो स्मार्टफोन को वाणिज्यिक और सरकारी दोनों उद्देश्यों के लिए सीधे उपग्रहों से जुड़ने की सुविधा देगा। यह नेटवर्क दुनिया भर में कहीं भी 4G और 5G वॉयस और वीडियो कॉल, मैसेजिंग, स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाओं को सपोर्ट करेगा।
इसरो अध्यक्ष ने श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में की पूजा लांचिंग से पहले इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने मंगलवार को तिरुमाला के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा की।

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