India : देशभर में रविवार रात आसमान कुछ अलग दिखाई देगा। उल्कापिंडों की बौछार से आकाश जगमगा उठेगा। उल्कापिंडों की बौछार की खास खगोलीय घटना है, लेकिन यह 13 दिसंबर की रात चरम पर होगी। नासा की रिपोर्ट के अनुसार पीक ऑवर्स के दौरान प्रति घंटे में 120 जेमिनीड उल्कापिंडों को देखा जा सकता है।
जेमिनिड के नाम से जानी जाने वाली उल्कापिंडों की यह बौछार साल की सबसे बड़ी उल्का पिंडों की बौछार होगी। जेमिनिड उल्कापिंडों की बौछार की सबसे अच्छी बात है कि कोई भी इसे देख सकता है और इसके लिए दूरबीन की आवश्यकता नहीं है। आकाश साफ रहने पर जेमिनीड उल्का बौछार भारत के हर हिस्से से दिखाई देगी। रात करीब 1-2 बजे पीक ऑवर्स के दौरान प्रति घंटे 150 उल्काएं दिखाई दे सकती हैं। रात 2 बजे उल्कापिंडों की बौछार चरम पर होगी, हालांकि इसे रात 9-10 बजे भी देखा जा सकता है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, जैमिनिड उल्कापिंडों की बौछार पहली बार 1800 के दशक के मध्य में देखी गई थी, लेकिन उस समय बौछारें इतनी ज्यादा नहीं थीं और प्रति घंटे सिर्फ 10-12 उल्कापिंडों को ही देखा गया था। खगोलविदों के अनुसार इस बार पीक आवर्स के दौरान एक घंटे में 120 जेमिनीड उल्का देखी जा सकती हैं। जेमिनिड चमकीले होते हैं और पीले रंग के होते हैं।

More Stories
पश्चिम बंगाल में 9 मई को होगा नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह
महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर अहम बैठक संपन्न
इंदौर मेट्रो के लिए एमपी ट्रांसको ने ऊर्जीकृत किया 200 एमवीए क्षमता का पॉवर ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर